Saturday, March 21, 2009

शेरो शायरी ....

"सरमें सौदा भी नहीं, दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकीन इस तर्के मुहब्बत का भरोसा भी नहीं
मुद्दते गुज़री तेरी याद भी आई हमें
और हम भूल गए हो तुझे ऐसा भी नहीं ...."



" मै तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने करीब पाता हूँ
कौन ये फासिला निभाएगा
मै फ़रिश्ता हूँ सच बताता हूँ "


"जान दी , दी हुई उसकी थी
हक़ तो यह है की हक़ अदा हुआ "

" यारों किसी कातिल से कभी प्यार मांगो,
अपने ही गले के लिए तलवार मांगो "


"मरीजे मोहब्बत उन्हीका फ़साना
सुनाता रहा दम निकलते निकलते
मगर जिक्र शाम आलम जब की आया
चरागे सहर बुझ गया जलते जलते ...."


" एक बस तूही नहीं मुझसे खफा हो बैठा ,
जो संग मैंने तराशा था वो खुदा हो बैठा "

" पड़ते है सूरते नक्शे कदम
छेडो हमें;
हम और भी मिल जायेंगे
खांक में उठा लेने से "


" जाते है शाख शाख को
देते हुए दुवां
आंधी से बच गए तो
इसी रुत में आएँगे "


"तड़पते हुए दिल की सदा
कोई सुने या ना सुने,
अपना तो काम है की
बस पुकारते रहे "


"हजारों ख्वाईशें ऐसी की, हर ख्वाईश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमांन लेकीन फ़िर भी कम निकले "


" जिंदगी एक हादसा है, और कैसा हादसा
मौत से भी ख़त्म जिसका सिलसिला होता नहीं "

"बदनाम हुए शहर में जिसकी वजह से फरझ,
उस शख्स को कभी हमने जी भर के देखा तक
नहीं । "

9 comments:

  1. बहुत खूब.
    --
    लिखते रहिये.

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  2. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  3. bhut sunder rachna
    keep writting

    gargi
    www.feelings4ever.blogspot.com

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  4. उम्दा शेरो को चुन चुन कर लायें है आप........
    शुक्रिया

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  5. Thanks Guys for all your wishes,

    By the way let me clear that, all of these Sher are not mine these are form very great writers, I am just posting it over here....

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  6. मेरी सांसों में यही दहशत समाई रहती है
    मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा।
    यूँ ही खिंचती रही दीवार ग़र दरम्यान दिल के
    तो सोचो हश्र क्या कल घर के आँगन का होगा।
    जिस जगह की बुनियाद बशर की लाश पर ठहरे
    वो कुछ भी हो लेकिन ख़ुदा का घर नहीं होगा।
    मज़हब के नाम पर कौ़में बनाने वालों सुन लो तुम
    काम कोई दूसरा इससे ज़हाँ में बदतर नहीं होगा।
    मज़हब के नाम पर दंगे, सियासत के हुक्म पे फितन
    यूँ ही चलते रहे तो सोचो, ज़रा अमन का क्या होगा।
    अहले-वतन शोलों के हाथों दामन न अपना दो
    दामन रेशमी है "दीपक" फिर दामन का क्या होगा।
    @कवि दीपक शर्मा
    http://www.kavideepaksharma.co.in
    इस सन्देश को भारत के जन मानस तक पहुँचाने मे सहयोग दे.ताकि इस स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सके और आवाम चुनाव मे सोच कर मतदान करे.
    काव्यधारा टीम

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  7. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    सुन्दर रचना के लि‌ए बधा‌ई
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    http://www.rachanabharti.blogspot.com
    कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
    http://www.swapnil98.blogspot.com
    रेखा चित्र एंव आर्ट के लि‌ए देखें
    http://chitrasansar.blogspot.com

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